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Sep 10, 2024

· 8 min read

बिना Emoji के chat

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बिना Emoji के chat

हम हमेशा दो जिंदगी जीते हैं, एक जो हम जी रहे होते हैं और दूसरा जो हम जीना चाहते हैं. यह कहानी वह दूसरे जिंदगी के नाम.

वैसे बात ज्यादा पुरानी है नहीं अभी 6 या 8 साल ही गुजरे है पर कभी-कभी लगता है किसी दूसरे जन्म की कहानी रही हो और कभी कभी लगता है कल की तो बात है. थोड़ा अजीब है पर सच कह रहा हूं उन दिनों की यादें कभी साफ नजर आती है तो कभी धुंधली. मुझे लगता है हर इंसान की जिंदगी में कुछ ऐसी यादें जरूर होती है जो उसको हँसा भी सकती है और रुला भी, depend करता है आप उस पलों को किस mood में याद कर रहे है.

पूरे गोविंदपुर मैं उस टाइम दो ही कोचिंग क्लासेस हुआ करते थे. यूं तो मैं पढ़ाकू किस्म का था नहीं, पर दोस्तों का देखा देखी में मैंने भी साइअन्स ले लिया.

साल के शुरूआती दिन थे, उन दिनों नई एडमिशन होते रहते थे ऐसे ही किसी एक दिन राजीव सर के साथ एक नई लड़की आई और सर ने इंट्रोडूस करवाया. नाम बताया 'परी'.

इस तरह हमारे क्लास में हो लड़की की जगह भर गई जिससे सभी लड़के बात करना चाहते थे. होती है ना हर क्लास में एक ऐसी लड़की अब रही मेरी बात, ना मैं पढ़ाई में ज्यादा अच्छा था ना दिखने में. जबकि 'परी' दिखने में बहुत सुंदर थी और पढ़ाई में भी तेज इसीलिए तो वह क्लास की सभी लड़कों की क्रश थी.

मुझे लगता था किसी को इंप्रेस करने की 2 तरीके होते हैं, पहला: उसे बहुत या हद से ज्यादा भाव दो और दूसरा : उसे भाव ही ना दो, अपना एटीट्यूड में रहो. मैंने दूसरा तरीका चुना क्योंकि पहले वाले को पूरा क्लास आजमा रहा था.

इसी तरह दो-तीन महीने गुजर चुके थे और 'परी' से मेरी ज्यादा बात हुई नहीं थी, उसी टाइम टेल्को के फेमस मैथ्स टीचर 'नकुल मास्टर' साहब ट्यूशन पढ़ाने लग गए थे मैंने और हमारे क्लास के कुछ बच्चों ने वहां क्लास जॉइन कर ली थी. हमारी कोचिंग की एकमात्र मैथ्स की लड़की 'परी' वहां जॉइन नहीं की थी क्योंकि बाकी सब लड़कियों ने बायो ली थी, ट्यूशन के टाइम 6:00 से 7:00 होती थी तो हमें 5:30 में निकल जाना होता था. बच्चे जो टेल्को के नजदीक रहते थे वह पैदल ही पहुंच जाया करते थे और बाकी जो मेरे जैसे दूर रहते थे उनको स्कूटी में जाना होता था.

1 दिन कोचिंग के फ्री टाइम में परी के साथ मेरा बातचीत हुई.

परी
“क्या नकुल सर अच्छा पढ़ाते हैं?”
“हां बहुत अच्छा पढ़ाते हैं, क्यों तुम भी ज्वाइन करने वाली हो क्या मैंने पूछा?”
परी
“हां मन तो है लेकिन कर नहीं पाऊंगी! सर तो इतना दूर पढ़ाते हैं, मैं चलकर जा नहीं सकती और स्कूटी है नहीं!”

उसकी परेशानी देखते हुए मैंने उसे पूछ ही लिया, “अगर तुम्हें कोई दिक्कत नहीं तो क्या तुम मेरे साथ चल सकती हो मैं तुम्हें सुबह तुम्हारे घर से पिक कर लूंगा और ट्यूशन खत्म होने के बाद तुम्हें वापस ड्रॉप भी कर दूंगा.”

मैंने यह सोचकर चांस मारा की “परी” के नजदीक आने का इससे अच्छा तरीका नहीं होगा, उसने सरप्राइज होकर कहा “सच्ची !”

कोई मुश्किल काम होता तो भी मैं नहीं छोड़ता इसमें कोई दिक्कत थी नहीं. टेल्को जाने के लिए राह घोड़ा तरफ से जाना होता था और उधर गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढे इसका पता ही नहीं चलता था, पर उसमें कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि लोग प्यार में चांद तारे तोड़ने की बात करते हैं पर मुझे तो बस कुछ गड्ढे ही पार करने थे.

इसी बहाने मैंने उससे उसका WhatsApp नंबर मांग लिया, मुझे लगा नहीं था वह देगी क्योंकि अनजान को अपना नंबर कैसे दे सकती है कोई लड़की. वह दिन से पहले मुझे कभी किसी चमत्कार की चीज पर भरोसा नहीं था पर उस दिन हो गया.

मुझे डर था, कि उसके पेरेंट्स मेरे साथ ट्यूशन छोड़ेंगे कि नहीं पर इस डर से ज्यादा खुशी थी की उसका नंबर अब मेरे पास है. घर पहुंचते ही मैंने उसका WhatsApp पर मैसेज किया डबल टिक हुआ और उसमें कोई रिप्लाई नहीं दिया फिर थोड़ी देर बाद उसका रिप्लाई आया और साथ ही हाथ लगाने वाला एक emoji.

फिर मैंने पूछा उससे क्या उसके पेरेंट्स राजी हैं! लेकिन उसने बोला “नहीं मेरे पेरेंट्स नहीं मान रहे”. (यह कोई चौंकने की बात नहीं थी क्योंकि जब सब सो रहे होंगे तब उनकी बेटी एक अनजान लड़के के साथ स्कूटी में ट्यूशन जा रही होगी, उनके लिए कोई क्रांति से कम थोड़ी थी)

कल कोचिंग में मिलते हैं यह बोलकर मैंने अफसोस के साथ चैट को खत्म किया. और सोचने लगा अगर वह ट्यूशन आती तो कितना अच्छा होता इस बात पर मैं कई फिल्मी सीन देख सकता था पर सोच कर क्या फायदा जब वह आ ही नहीं सकती थी. अब मैं इस दुविधा में था की कल कोचिंग में उससे बिहेव कैसे करूंगा पहले जैसा अलग रहूंगा या एकदम फ्रेंकली बात करूंगा या अच्छा दोस्त जैसा behave करूंगा, मैं सारी रात उसके बारे में सोचता रहा, उसके बारे में सोचना इतना अच्छा लग रहा था की नींद मुझसे रूठ के बहुत दूर चली गई थी.

अगले दिन कोचिंग पहुंचा तो आंखें ‘परी’ को खोजने लगी थी पर वो उस दिन कोचिंग ही नहीं आई उसकी गैर मौजूदगी इतनी गल रही थी. बड़ी मुश्किल से वो लंबा दिन गुजरा घर जाते ही मैंने परी को सबसे पहले मैसेज किया “हेलो ‘परी’ ” डबल टिक तो हो चुका था पर रिप्लाई नहीं आया था, फिर कुछ देर बाद रिप्लाई आया, तो मैंने उससे पूछा “आज कोचिंग क्यों नहीं आई?”

उसने यह कारण दिया कि वह घर वालों से नाराज़ थी. मुझे तो नाराज़ होने का कारण पता था इसलिए मैंने उसे नहीं पूछा. अब हमारी बात आगे बढ़ी.

“तो कल कोचिंग आओगे या नहीं ” मैंने पूछा.
परी
“नहीं नहीं कल आऊंगी लेकिन उससे पहले नकुल सर के पास ट्यूशन जाऊंगी इसीलिए सुबह जब घर से निकलोगे तो कॉल करना मैं रोड पर ही मिलोगी”.
“राहुल और एक बात बोलूं बुरा मत मानना”
परी
“तुम ना चार्ट में emoji यूज कर लिया करो बिना Emoji के चार्ट जैसे बिना क्रीम के केक लगता है”.

मन किया कि बोल दूं की बिना क्रीम के भी केक मार्केट में मिलते हैं सस्ते भी होते हैं और बहुत लंबे भी टिकता है. फिर सोचा रिश्ता बनने से पहले टूट ना जाए इसीलिए एक हंसने वाला Emoji भेज के लिख दिया “ऑफ कोर्स”, उस रात भी जल्दी नींद नहीं आई देर से सोया पर 5:00 बजने से पहले ही उठ गया.

फिर मैंने रोज की तरह मैथ की बुक और कॉपी उठाई स्वेटर पहन के ‘परी’ को तैयार रहने के लिए फोन किया और स्कूटी स्टार्ट करके गोविंदपुर की ओर चल पड़ा बहुत खुश था अब हर रोज एक हमसफ़र साथ रहेगा, कोचिंग और ट्यूशन पहले जैसे बोरिंग नहीं थे.

एक दिन परी ने आधे रास्ते में स्कूटी रुकवा कर बोली “राहुल अगर तुम्हें कोई एतराज ना हो तो मैं स्कूटी चला लूं” सच बोलो तो वह कोई फिल्मी सीन जैसा ही लग रहा था. जहां स्कूटी परी चला रही थी और पीछे में बैठा हुआ था मन किया की आदित्य चोपड़ा की फिल्मों की तरह उसका कमर पर हाथ रख दूं. पर वो कोई फिल्मी सीन थोड़ी थी कई हीरो बनने के चक्कर में मुझे विलन ना बना दे इसीलिए मैंने अपने हाथ पीछे रख लिया.

शायद परी नहीं होती तो वह ट्यूशन में कब का छोड़ चुका होता पर उसके साथ के यह मुश्किलें अच्छी लगने लगी थी. क्लास में सब जानते थे की परी और राहुल सिर्फ दोस्त नहीं है और ये बात हम दोनों भी जानते थे पर पता नहीं क्यों ‘परी’ यह बात सबको कहने से डरती थी. उस वक़्त कभी कभी हमारी देर रात तक आउट ऑफ सिलेबस की बातें भी होती थी. खैर स्कूल के दिन कब पूरे हुए पता ही नहीं चला और ट्यूशन के आखिरी दिन परी ने मुझसे कहा कि राहुल 2 महीने बाद मुझे तुमसे कुछ कहना है. 2 महीने कब 6 साल बन गया पता ही नहीं चला. 12वीं के बाद मैं दिल्ली आ गया और ‘परी’ ने रांची से कॉलेज किया. शायद कुछ रिश्तों में Breakup नहीं होते पर फिर भी वो टूटते हैं.

हमने ना कभी एक दूसरे को I love you कहा ना Hate you. यह जानते हुए भी हम केवल दोस्त नहीं थे हमने उस होनी को बरकार रखने की कोशिश भी ना की पर आज जब उसके सोशल मीडिया हैंडल को चेक किया उसने कोर्ट मेरिज वाले फोटो लगा रखी थी. तो स्कूटी की सवारी से लेकर उसके साथ देर रात तक चैट करना और चैट में Emoji ना यूज करने पर रूठ जाना सब याद आ गया, ट्यूशन जाते हुए वो खाली सड़कें हमारी प्यार की एकलौती गवाही थी, आज भी उन सड़कों से जब अकेले गुजरता हूं तो लगता है कोई साथ है.

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